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Tuesday, 15 May 2018
"तुम मेरे दिल में हो"
मेरा दिल तुम्हारे हाथों में है जैसे कोई आईना ! मेरी जान तेरी कदमों में है जैसे कि घूल ! मैं तुम्हारे बाँहों में कैद हूँ जैसे कि बंदनी ! मेरी धड़कती साँसे कहती है तुम मेरे दिल में हो ! कुमारी अर्चना पूर्णियाँ,बिहार, मौलिक रचना, १५/५/१८
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